Thursday, January 22, 2015

Day-3 of pagalpan

मेरे पागलपन का तीसरा दिन कई दिनों के बाद आया, मुझे लगा था मैं इन दिनों ठीक हो रहा, पर ऐसा नहीं था, मुझे बोरियत नाम का इंजेक्शन दिया गया था। साज़िश रही होगी किसी की और शायद ऐसी ही साज़िश बीच बीच में चलती रहेगीसाज़िश ...............किसी की.................. मानो कोई दूसरा कर गया , पर सच तो ये है ज्यादातर साज़िश तो हम खुद से करते है , मसलन- तसल्ली , बोरियत, आँखों पे पट्टी और जाने क्या क्या| आखों पे पट्टी से याद आया , एक ज़माना था जब पट्टी हटाने का जरिया कम था , पर आजकल एक अजीब सी पट्टी बाजार में आई है वो भी एकदम टिकाऊ - अवेयरनेस की पट्टीआज हम सब बहुत अवेयर है, इतने अवेयर की ब्रोकर बन बैठे हैं हाँ.... जैसे राजनीतिक चर्चा में दल पक्ष के ब्रोकर बनकरलगता है हम वोटर नहीं ब्रोकर बन गए हो| हमारे देश की विडंबना देखिये , जहाँ हमे वोटर बनकर सही गलत को सामने रखकर चर्चा करनी चाहिए, वहां हम ब्रोकर बन कर किसी दल के पक्ष में गलत को सहीसही को गलत बताकर  खुद से पक्षपात करते है| हुई ना खुद से साज़िश...... या फिर साज़िश.... किसी की......... शायद मैं गलत हूँ....... हम सब बहुत अवेयर हैं|

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