मेरे पागलपन का तीसरा
दिन कई दिनों
के बाद आया,
मुझे लगा था
मैं इन दिनों ठीक हो
रहा, पर ऐसा
नहीं था, मुझे
बोरियत नाम का
इंजेक्शन दिया गया
था। साज़िश रही
होगी किसी की
और शायद ऐसी
ही साज़िश बीच
बीच में चलती
रहेगी| साज़िश ...............किसी की.................. मानो
कोई दूसरा कर
गया , पर सच
तो ये है
ज्यादातर साज़िश तो हम
खुद से करते
है , मसलन- तसल्ली
, बोरियत, आँखों पे पट्टी
और न जाने
क्या क्या| आखों
पे पट्टी से
याद आया , एक
ज़माना था जब
पट्टी हटाने का
जरिया कम था
, पर आजकल एक
अजीब सी पट्टी
बाजार में आई
है वो भी
एकदम टिकाऊ - अवेयरनेस
की पट्टी| आज हम
सब बहुत अवेयर
है, इतने अवेयर
की ब्रोकर बन
बैठे हैं।
हाँ.... जैसे राजनीतिक
चर्चा में दल
पक्ष के ब्रोकर
बनकर| लगता
है हम वोटर
नहीं ब्रोकर बन
गए हो| हमारे
देश की विडंबना
देखिये , जहाँ हमे
वोटर बनकर सही
गलत को सामने
रखकर चर्चा करनी
चाहिए, वहां हम
ब्रोकर बन कर
किसी दल के
पक्ष में गलत
को सही - सही
को गलत बताकर खुद
से पक्षपात करते
है| हुई ना
खुद से साज़िश......
या फिर साज़िश....
किसी की.........।
शायद मैं गलत
हूँ....... हम सब
बहुत अवेयर हैं|
Thursday, January 22, 2015
Thursday, January 8, 2015
Day-2 of pagalpan
आज एक नये दिन चाय की चुस्की के साथ मेरा दिमाग फिर ठनका, शायद नए धर्म बनाने का भूत अभी नहीं उतरा | लगता है कुछ कर गुजरने की ठान ही लिया है पहली बार । पहली बार.......... मैं फिर सोच में पड़ गया, क्या ये पहली बार है । जवाब मिला ....नहीं । बचपन से लेकर आजतक हर एक दिन का वो ठानना याद आ गया | हर उस ठानने को यहाँ उतारने का मन किया । मगर कैसे... फिर सोच में पड़ गया | कितना कुछ था , कुछ समझ ही नहीं आया । शायद मैं फिर भटक गया कुछ नई चीज़ उतारने के लिए | खुद से भटकना शायद मेरी ज़िन्दगी का हिस्सा हो गया है । अंग्रेजी का एक शब्द वर्सटाइल याद आ गया , शायद इसका मतलब गुड फॉर नथिंग होता है मेरी समझ से| आपकी राय में इसका क्या मतलब है। इस शब्द को याद करने का ये मतलब नहीं कि मैंने अपने आप को वर्सटाइल कहा , इसका मतलब गुड फॉर नथिंग भी हो सकता है , महज एक संभावना है, एक कयास है । मुझे जानने वाले अपना कयास अपने पास रखे। लोलवा । लोलवा भी अजीब शब्द है| वर्सटाइल लोग समझ गए होंगे| पर मैं नहीं समझा कि आज इतना क्यूँ भटक रहा हूँ। ये भटकता मन फिर मुझे भटका रहा, कहीं मैं, भटकिओसिस , एक प्रकार का मानसिक रोग , से पीड़ित तो नहीं । या फिर मैं भटकल निवासी तो नहीं| आखिरकार मुझे नए धर्म का नाम मिल ही गया , "भटकल धर्म" |
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