आज एक नये दिन चाय की चुस्की के साथ मेरा दिमाग फिर ठनका, शायद नए धर्म बनाने का भूत अभी नहीं उतरा | लगता है कुछ कर गुजरने की ठान ही लिया है पहली बार । पहली बार.......... मैं फिर सोच में पड़ गया, क्या ये पहली बार है । जवाब मिला ....नहीं । बचपन से लेकर आजतक हर एक दिन का वो ठानना याद आ गया | हर उस ठानने को यहाँ उतारने का मन किया । मगर कैसे... फिर सोच में पड़ गया | कितना कुछ था , कुछ समझ ही नहीं आया । शायद मैं फिर भटक गया कुछ नई चीज़ उतारने के लिए | खुद से भटकना शायद मेरी ज़िन्दगी का हिस्सा हो गया है । अंग्रेजी का एक शब्द वर्सटाइल याद आ गया , शायद इसका मतलब गुड फॉर नथिंग होता है मेरी समझ से| आपकी राय में इसका क्या मतलब है। इस शब्द को याद करने का ये मतलब नहीं कि मैंने अपने आप को वर्सटाइल कहा , इसका मतलब गुड फॉर नथिंग भी हो सकता है , महज एक संभावना है, एक कयास है । मुझे जानने वाले अपना कयास अपने पास रखे। लोलवा । लोलवा भी अजीब शब्द है| वर्सटाइल लोग समझ गए होंगे| पर मैं नहीं समझा कि आज इतना क्यूँ भटक रहा हूँ। ये भटकता मन फिर मुझे भटका रहा, कहीं मैं, भटकिओसिस , एक प्रकार का मानसिक रोग , से पीड़ित तो नहीं । या फिर मैं भटकल निवासी तो नहीं| आखिरकार मुझे नए धर्म का नाम मिल ही गया , "भटकल धर्म" |
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