Thursday, January 8, 2015

Day-2 of pagalpan

आज एक नये दिन चाय की चुस्की के साथ मेरा दिमाग फिर ठनका, शायद नए धर्म बनाने का भूत अभी नहीं उतरा | लगता है कुछ कर गुजरने की ठान ही लिया है पहली बार पहली बार.......... मैं फिर सोच में पड़ गया, क्या ये पहली बार है जवाब मिला ....नहीं बचपन  से लेकर आजतक हर एक दिन का वो ठानना याद गया | हर उस ठानने को यहाँ उतारने का मन किया मगर कैसे... फिर सोच में पड़ गया | कितना कुछ था , कुछ समझ ही नहीं आया शायद मैं फिर भटक गया कुछ नई चीज़ उतारने के लिए | खुद से भटकना शायद मेरी ज़िन्दगी का हिस्सा हो गया है अंग्रेजी का एक शब्द वर्सटाइल याद गया , शायद इसका मतलब गुड फॉर नथिंग होता है मेरी समझ से| आपकी राय में इसका क्या मतलब है। इस शब्द को याद करने का ये मतलब नहीं कि मैंने अपने आप को वर्सटाइल कहा , इसका मतलब गुड फॉर नथिंग भी हो सकता है , महज एक संभावना है, एक कयास है मुझे जानने वाले अपना कयास अपने पास रखे। लोलवा लोलवा भी अजीब शब्द है| वर्सटाइल लोग समझ गए होंगे| पर मैं नहीं समझा कि आज इतना क्यूँ भटक रहा हूँ। ये भटकता मन फिर मुझे भटका रहा, कहीं मैं, भटकिओसिस , एक प्रकार का मानसिक रोग , से पीड़ित तो नहीं या फिर मैं भटकल निवासी तो नहीं| आखिरकार मुझे नए धर्म का नाम मिल ही गया , "भटकल धर्म" |                             

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